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आख़िर रेप क्यों होते है...?


यह लेख 7 साल पहले लिखा था, लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी है. अक्सर इस देश में चर्चा होती है कि रेप क्यों होते है? आज इसी सवाल के जबाव से मैं आप सभी को रूबरू करवाना चाहता हूँ. हो सकता है कि इस लेख में मेरे द्वारा उपयोग किए जाने वाले शब्द आपको पसन्द ना आये. लेकिन मैं उसी भाषा का इस्तेमाल करूँगा, जो आमतौर पर प्रचलित है.


दो स्तन, एक वेजाइना और पेनिस; शायद इन्ही के होने से रेप होता है. लेकिन इनके कारण रेप नहीं हो सकता क्योंकि ये शारीरिक अंग तो जानवरों के पास भी होते है. क्या आप रोज़ अख़बारों में पढ़ते है कि किसी बकरी, कुतिया या गाय का रेप हुआ; जबकि उनके पास तो 2 से अधिक स्तन होते है. मेरा मानना है कि स्तन रेप का कारण नहीं हो सकते, क्योंकि जिन छोटी-छोटी बच्चियों के स्तन नहीं होते उनके साथ भी अक्सर रेप की घटनाएं घटित होती है.


अब मैं सोचता हूँ कि फिर तो इस वेजाइना के कारण ही रेप होते होंगे. लेकिन ऐसा भी नहीं है क्योंकि Child Abuse के बहुत से केस हैं, जहाँ छोटे लड़कों (Baby Boy) का भी रेप होता है. वहाँ कोई वेजाइना नहीं होती है, लेकिन फिर भी छोटे लड़कों के साथ होने वाली यौन शोषण की काफी शर्मनाक घटनाएं अक्सर सामने आती रहती है.


हो सकता है कि आप और हम में से भी कई लोगों के साथ बचपन में यौन शोषण की घटना घटित हुई हो. आप उसे क़बूल करें या ना करें लेकिन मैं क़बूल करता हूँ कि मेरे और मेरे कज़िन के साथ ऐसा हुआ था. यह बात उस वक्त की जब मैं लगभग 6-7 साल का था. मेरे गाँव में एक “राम्या बामण” था, वो गाँव में बाड़ी (खीरे, तरबूज़, ककड़ी आदि की फसल) करता था, हम अक्सर उसके खेत पर तरबूज़ और ककड़ी लेने जाते थे. एक दिन मैं और मेरा कज़िन उसके खेत पर गये. हमने सब्ज़ियाँ ली और जाने लगे तो उसने हमें आवाज़ दी कि इधर आओ. उसके बाद हम उसके पास चले गये, उसने हमसे बात-चीत शुरू की और धीरे-धीरे उसने हम दोनों के जनजांगों को सहलाने की कोशिश की तो मेरे कज़िन ने उसे धक्का दिया और मुझसे भागने को कहा. उसके बाद हम वहाँ से भाग आयें, अगर उस दिन मेरे से तीन साल बड़ा मेरा कज़िन मेरे साथ नहीं होता तो शायद मेरे साथ भी कुछ ग़लत घटित हो सकता था. इस घटना के बाद मन में इतना भय बैठ गया कि मैं कभी उसके खेत के आस-पास से नहीं गुजरा. साथ में वो घटना अभी भी मस्तिष्क में आती रहती है. वैसे जब मैं कॉलेज में पहुँचा तो मन किया कि एक बार उस शख़्स से मिलूँ और ताकि उसको थप्पड़ लगा सकूँ. जब गाँव में उसके बारें में पता किया तो पता चला कि उसका देहांत हो चुका है और वो एक यौन कुंठित शख़्स था.

अब मैं सोचता हूँ कि रेप पेनिस के कारण होते होंगे. लेकिन हमने कई छात्रावासों, सेना के कैम्पों और जेलों के ना जाने कितने किस्से सुने है; जहाँ लड़को के साथ रेप की घटना होती है. मतलब साफ है कि जिनके पास पेनिस है, उनका भी रेप होता है. अगर रेप की शर्मनाक घटनाएं सिर्फ पेनिस के कारण होती तो गैंग रेप के बाद लड़की के शरीर में सरिये, कंकर, कांच (दिल्ली, रोहतक और अन्य कई गैंग रेप में ऐसा हुआ था) क्यों डालते?


अभी तक की चर्चा से तो रिजल्ट यही निकलता है कि रेप की घटनाएं पेनिस, वेजाइना और स्तनों (शरीर की संरचना) के कारण नहीं होती है.



फिर आखिर रेप होते क्यों है?


अब लोग सोच रहे होंगे कि लड़कियों के पहनावे के कारण रेप की घटनाएं होती है. अगर ऐसा होता तो क्या कभी बुर्के वाली, सलवार सूट वाली या साड़ी वाली महिला का रेप होता. छोटे कपड़ों की वजह से ही रेप होते तो पश्चिमी देशों में हर मिनट में 10-20 रेप होते. अगर आपकी ये बात हम मान भी लें कि कम कपड़े ही रेप की असली वजह है; ऐसी स्थिति में यदि तुम अपनी माँ-बहन-बेटी को कम कपड़ों में देख लो तो क्या तुम अपनी माँ-बहन-बेटी का भी रेप कर दोगे क्या? नहीं करोगे ना? मतलब साफ़ है कि लड़कियों के तन ढकने मात्र से भी रेप की घटनाएं नहीं रुकेंगी. जो लड़कियों के पहनावे को रेप की घटनाओं के लिए दोष देते है, वो सबसे बड़े बेवकूफ है.


जो लोग मोबाइल, टीवी, इंटरनेट और पॉर्न कंटेट को इन रेप की घटनाओं के लिए जिम्मेदार मानते है. उनकी सोच भी बहुत गलत है. ये चीजें रेप के लिए कभी पूर्णत: उत्तरदायी नहीं हो सकती है.


नशे को भी दोष देना गलत है, क्योंकि नशा करना सिर्फ़ रेप की वजह नहीं हो सकती है. मैं, मेरे दोस्त और हमारी कई महिला मित्र भी एल्कोहोल का सेवन करते है, लेकिन हमने कभी ऐसी घटनाओं को अंजाम नहीं दिया.


अब मैं अपने उस जबाब पर आता हूँ, जिसकी वजह से रेप होते है. रेप उस मानसिकता के कारण होते है, जो लड़की की शर्ट के दो बटनों के बीच से स्तनों को देखने की कोशिश करते है. जो लोग सानिया मिर्ज़ा के खेल की नहीं बल्कि उनकी छोटी स्कर्ट की बात ज्यादा करते हैं. जो सूट के कोने से दिख रही ब्रा की स्ट्रिप को घूरते रहते है. जो औरत के जिस्म को देखकर उसके फिगर के साइज़ का अनुमान लगाने की कोशिश करने लगते है. जो राह चलती लड़कियों के हिप्स को पीछे से निहारते रहते है. जो स्कर्ट पहनी लड़की की टाँगे घूरते रहते है और सोचते है कि कब थोड़ी सी स्कर्ट खिसके और कब पेंटी का कलर देख सकें. जो पार्क में बैठे कपल्स को देखकर सोचते है कि काश ये लड़की मुझे मिल जाये तो मैं इसके साथ ही ये कर दूँ - मैं वो कर दूँ. जब ज़िक्र इतनी बातों का हो चुका है तो ज़िक्र उस मानसिकता का भी करना ज़रूरी है; जब एक दोस्त दूसरे से कहता है कि तू अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रातभर रुका और तूने कुछ नहीं किया, नामर्द है क्या?


वास्तविकता यह है कि रेप सिर्फ गन्दी मानसिकता के कारण होता है, जहाँ औरत को सिर्फ इस्तेमाल का सामान समझा जाता है. और जब ऐसी गंदी मानसिकता के लोगों को इस्तेमाल के लिए औरत नहीं मिलती है तो वो बच्चियों और लड़कों के साथ भी यौन उत्पीड़न की घटनाओं को अंजाम दे देते है.


रेप, यौन शौषण और छेड़खानियों की घटनाएं तभी रुकेगी, जब हम हमारी मानसिकता चेंज करेंगे. जब हम महिलाओं को अपनी माँ, बुआ, बहन, बेटी और दोस्त की नजर से देखेंगे. जब हम अपने बच्चों को संस्कार देंगे और सरकार Sex Education को बढ़ावा देगी; तब ही ऐसी घटनाओं से निजात पाई जा सकती है वरना नहीं.


©गीता यादव और अर्जुन महर



(अर्जुन महर दिल्ली विश्वविद्यालय में लॉ के स्टूडेंट है और वामपंथी छात्र संगठन AISA से जुड़े हुए है. साथ में दो किताबें भी लिख चुके है)


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